भारत की1857 की क्रांति / 1857 ki kranti in india


1857 की क्रांति (Political Science )


1857 ki kranti in india


(1) राजनैतिक कारण:-

  (i) वेलेजली की सहायक संधि की निति :-

  • ü       सम्बंधित रियासत में ब्रिटिश पोलिटिकल एजेंट की नियुक्ति |
  • ü        रियासत की सुरक्षा का भर अंग्रेजो के अधीन होगा |
  • ü        रियासत की विदेश निति का सञ्चालन अंग्रेज करेंगे |

 (ii) लार्ड डलहौजी की नीतिया :-

  • ü       डलहौजी की नीतिया क्रांति के लिए सर्वाधिक जिम्मेदार थी |
  • ü       सर्वप्रथम 1848 में सतारा रियासत का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय किया गया |
  • ü       1836 में अंतिम रूप से कुशासन का आरोप लगाकर अवध का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय किया गया |
  • ü       कानपूर के नाना साहब को दी जाने वाली 8 लाख की वार्षिक पेंशन बंद कर दी गयी |
  • ü      झांसी की रानी लक्समी बाई ने अंग्रेजो की गॉड निषेध निति का विरोध किया |
  • ü     भारतीयों को प्रशासन में न्यूनतम भागीदारी,वयस्क मताधिकार का अभाव तथा अंग्रेजो की साम्राज्यवादी निति विद्रोह के लिए जिम्मेदार थी |

(2) धार्मिक सामाजिक कारण :-

  • ü       रुडयार्ड किपलिंग के 'श्वेत जाति का भार' सिद्धांत के अनुसार अंग्रेजो ने कहा कि,"उन्हें ईश्वर ने भारत भेजा  है   ताकि असभ्य भारतीयों को सभ्य बनाया जा सके"|
  • ü      अंग्रेजो द्वारा भारतीय देवी-देवताओ का अपमान किया गया |
  • ü       धार्मिक निर्योग्यता कानून के तहत अंग्रेजो ने धर्म परिवर्तन करने वाले लोगो को उनकी पैतृक सम्पति में   अधिकार दिया,जिसका रूढ़िवादी भारतीयों ने विरोध किया |

(3) आर्थिक कारण :-

  • ü       ब्रिटिश आर्थिक नीति के कारण भारतीय कुटीर उद्योगों का पतन हुआ तथा किसानो  को  खाद्यान  के  स्थान  पर  नगदी फसलें (नील) उपजाने के लिए मजबूर किया गया |
  • ü      अंग्रेजों ने स्थायी बंदोबस्त,रैयतवाड़ी व्यवस्था तथा महलवाड़ी व्यवस्था के माध्यम से भारतीय किसानो का  अधिकाधिक शोषण किया तथा कृषि का पतन हुआ |
  • ü    मजदुर का वेतन,बिमा सुविधाओं का अभाव,चिकित्सा सम्बन्धी सुविधाओं का अभाव के कारण असंतुष्ट थे |

Fact:-
 ददनी:- कारीगरों को दिया गया अग्रिम पैसा |

(4) सैनिक कारण :-

  • ü         भारतीय सैनिको ने काम वेतन,पदोनति का अभाव तथा खानपान सम्बन्धी असुविधाओं के कारण  विद्रोह  किया |
  • ü       1856 के सामान्य सेवा भर्ती अधिनियम कानून के तहत प्रत्येक भारतीय सिपाही को विदेश सेवा करना  अनिवार्य था,जिसका भारतीय सैनिको ने विद्रोह किया |
  • ü        तत्कालीन कारण के तौर [ार चर्बी वाले कारतूसों ने हिन्दू मुस्लिम सैनिको कि भावनाओ को आहत किया,इस समय ब्रॉउन बेस बन्दूक के स्थान पर एनफील्ड राइफल का सेना में प्रयोग किया गया,जिसमे लगे चर्बी वाले कारतूसों के विरोध में क्रांति कि शुरुआत हुई|

  • ü    क्रांति कि निर्धारित तिथि :- 31 मई 1857
  • ü    क्रांति का प्रतीक:- कमल का फूल और रोटी(चपाती)

  • ü      क्रांति के समय गवर्नर जनरल लार्ड कैनिंग थे तथा डलहौजी कि नीतिया सर्वाधिक जिम्मेदार थी |
  • ü        29 मार्च 1857 को 34वी रेजिमेंट के सैनिक मंगल पांडेय ने बैरकपुर छावनी (कलकत्ता) में अपने अंग्रेज  अधिकारियो लेफ्टिनेंट बाग़ सार्जेंट ह्यूसन कि हत्या कि,तथा 8 अप्रेल को अंग्रेजो ने मंगल पांडेय को  फांसी दे दी |
  • ü       10 मई 1857 को मेरठ से क्रांति कि शुरुआत हुई |
  • ü       दिल्ली में विद्रोह का नेतृत्व बहादुरशाह जफर बख्त खान ने किया |
  • ü       बहादुरशाह को क्रांतिकारियों ने अपना नेता घोषित किया था |
  • ü       सितम्बर 1857 में दिल्ली में विद्रोह का दमन निकलसन हडसन के नेतृत्व वाली अंग्रेज सेना ने किया    बहादुरशाह को गिरफ्तार क्र रंगून(बर्मा) भेज दिया,जहाँ उनकी म्रत्युहो गयी |
  • ü       कानपूर में विद्रोह का नेतृत्व नाना साहब (धुन्धुपंत) ने किया,जिसका कारण अंग्रेजो द्वारा नाना साहब को दी जाने वाली 8 लाख रूपये वार्षिक पेंशन बंद करना था |
  • ü       कानपूर में विद्रोह का दमन केम्पबेल के नेतृत्व में अंग्रेजी सेना ने किया |
  • ü       नाना साहब नेपाल चले गए,जहाँ उनकी म्रत्यु हो गयी |
  • ü       लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व बेगम हजरत महल बिरजिस कादिर ने किया |
  • ü        बेगम हजरत महल को "महक परी" कहा जाता है |
  • ü      बेगम हजरत महल नेपाल चली गयी,जहाँ उनकी मृत्यु हो गयी |
  • ü      बिहार के आरा और जगदीशपुर में विद्रोह का नेतृत्व कुंवर सिंह ने किया था |
  • ü      मेरठ में विद्रोह का नेतृत्व कदम सिंह ने किया |
  • ü      मथुरा में विद्रोह का नेतृत्व देवी सिंह ने किया |
  • ü      हरियाणा के रेवाड़ी में विद्रोह का नेतृत्व राव तुलाराम ने किया था |
  • ü      ग्वालियर में विद्रोह का नेतृत्व तात्या टोपे ने किया था |
  • ü      तात्या टोपे ने लक्ष्मी बाई नाना साहब के विद्रोह में सहयोग किया था |
  • ü      अपने मित्र मानसिंह के विश्वासघात के कारण तात्या टोपे को गिरफ्तार कर अंग्रेजो ने फांसी दे दी |(18 अप्रेल 1859)
  • ü      झाँसी में विद्रोह का नेतृत्व लक्ष्मी बाई ने किया था,जिनके अन्य नाम थे-महल परी,मनु,मणिकर्णिका |
  • ü      लक्ष्मी बाई ने विद्रोह अंग्रेजो द्वारा दत्तक पुत्र दामोदर राव को उत्तराधिकारी मानने के कारण किया |
  • ü      जून 1857 में लक्ष्मी बाई जनरल ह्यूरोज के विरुद्ध युद्ध करते हुऐ शहीद हुई |
  • ü       महाराष्ट्र के सतारा में क्रांति का नेतृत्व रंगजी बापू ने किया था तथा रंगजी बापू और अजीमुल्लाह खान ने लन्दन में क्रांति कि योजना बनाई थी |
  • ü     फ़ैजाबाद में क्रांति का नेतृत्व मौलवी अहमदउल्ला ने किया,इसने क्रांति को जिहाद घोषित किया था |
  • ü    उत्तरप्रदेश के रुहेलखंड में क्रांति का नेतृत्व खान बहादुर ने किया |
  • ü     बरेली में विद्रोह का नेतृत्व - बख्त खान |
  • ü     ओडिशा में - सुरेंद्र शाही और उज्जवल शाही |
  • ü       असम में :- मनीराम और कंदपेशवर सिंह |
  • ü       कोटा में :- जयदयाल मेहराब खान |
  • ü       नीमच में :- हिरा सिंह ने |
  • ü       टोंक में :- मीर आलम खान ने |
  • ü       आऊवा में :- कुशाल सिंह चम्पावत ने |

क्रांति का स्वरूप :-

  • ü       वी.डी.सांवरकर ने क्रांति को "भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम "कहा |
  • ü       अशोक मेहता ने "राष्ट्रीय विद्रोह" कहा है|
  • ü       आर.सी.मजूमदार ने "यह तो प्रथम, ही स्वतंत्रता संग्राम था"|
  • ü       जॉन सिले ने "स्वार्थी सैनिको का विद्रोह" कहा |
  • ü      बेंजामिन डिजरायली :- क्रांति को राष्ट्रीय विद्रोह बताया |

1857 कि क्रांति से सम्बंधित पुस्तके :-

  • ü        इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेस  :-  वी.डी.सांवरकर
  • ü     ग्रेट रिबेलियन :- अशोक मेहता |
  • ü     1857  :-  एस.एन. सेन |
  • ü      माझा प्रवास :- विष्णु नारायण |
  • ü       सिपाही म्यूटिनी :-  आर. सी. मजूमदार

क्रांति के परिणाम :-

  • ü        1858 में कंपनी का शासन समाप्त कर दिया गया तथा भारत का प्रशासन चलने के लिए लंदन में भारत सचिव  और उसकी 15 सदस्य परिषद का गठन किया गया |
  • ü      प्रथम भारत सचिव चार्ल्स वुड थे |
  • ü      क्रांति के बाद कैनिंग प्रथम वायसराय बने अर्थात प्रांतो के प्रतिनिधि के तौर पर उसे गवर्नर जनरल और रियासतों के प्रतिनिधि के तौर पर उसे वायसराय कहा जाने लगा |
  • ü      क्रांति के बाद अंग्रेजो ने फूट डालो राज करो कि नीति का अनुसरण किया |
  • ü       सेना का जातीय आधार पर विभाजन किया गया |

क्रांति कि विफलता के कारण :-

  • ü       समय से पहले शुरू होना |
  • ü      योग्य नेतृत्व का अभाव |
  • ü      स्थानीय शासको द्वारा क्रांतिकारियों को सहयोग करना |
  • ü       निश्चित योजना का अभाव |
  • ü      मध्यम वर्ग द्वारा सहयोग का अभाव |

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