मनोविज्ञान


मनोविज्ञान :-



मनोविज्ञान के महत्वपूर्ण नोट्स :-

  • शैशवावस्था में वृद्धि तीव्र,बाल्यावस्था में मंद तथा 11 वर्ष की आयु में वृद्धि तीव्र हो जाती है |
  • शैशवावस्था की आयु - 5 से 6 वर्ष
  • बाल्यावस्था की आयु - 6 से 12 वर्ष
  • किशोर अवस्था की आयु - 12 से 18 वर्ष
  • वयस्क आयु - 18 वर्ष से बाद की आयु
  • प्याजै ने अवस्था को 'अवधि'कहा है |

विकास के सिद्धांत :-

  • मनोलेंगिक विकास सिद्धांत :- फ्राइड ने दिया |
  • संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत :- पियाजे ने
  • मनो-सामाजिक सिद्धांत :- इरिक्सन ने
  • भाषा विकास सिद्धांत :- चॉमस्की ने
  • नैतिक विकास सिद्धांत :- कोल्हबर्ग ने
  • विकास सिर से पैर की दिशा में होता है |
  • बाल्यावस्था को 'प्रतिद्वन्दात्मक समाजीकरण का काल' किलपैट्रिक ने कहा है |
  • शैशवावस्था में शिशु आत्मकेंद्रित होता है |
  • कल्पनाशक्ति एवं अमूर्त चिंतन बाल्यावस्था के उत्तरार्ध में प्रारम्भ हो जाते है |
  • बालविकास को सर्वाधिक प्रभावित करने वाला करक 'खेल कूद का मैदान' होता है |
  • "किशोरवस्था जीवन में क्रन्तिकारी परिवर्तन,कदिन संघर्ष तूफानी दौर का समय है" यह स्टेनले हॉल ने कहा है |
  • बाल्यावस्था को 'छदम परिपक्वता का समय" रॉस ने कहा है |
  • चरित्र को "आदतों का पुंज" सैमुअल स्माइल ने कहा है |
  • 2 वर्ष तक बालक के सभी संवेग विकसित हो जाते है |
  • समूह की आयु बाल्यावस्था को कहा गया है |
  • वंश परम्परा के मुख्य वाहक जीन्स होते है |
  • प्याजै ने संज्ञानात्मक विकास को चार भागो में विभाजित किया था |
  • जन्म के समय शिशु में संवेगो का अभाव होता है,उस समय शिशु में सिर्फ उत्तेजना,कष्ट तथा बैचेनी आदि संवेग ही पाए जाते है |सभी संवेग शिशु में 2 वर्ष की आयु तक विकसित हो जाते है |
  • मैक्डूगल गिल्फोर्ड ने 14 संवेग बताये है |
  • जीवन का सबसे महत्पूर्ण काल शैशवावस्था को कहा गया है |
  • बीसवीं शताब्दी हो 'बालक की शताब्दी' क्रो क्रो ने कहा है |
  • शैशवावस्था को सिखने का आदर्श काल वेलेंटाइन ने माना है |
  • जीवन का अनोखा काल बाल्यावस्था को कहा गया है |
  • गिल्फोर्ड ने संवेगो के तीन वर्ग बनाये थे |
  • बाल्यावस्था को संवेगात्मक विकास का अनोखा काल कोल ने कहा है |
  • 6 वर्ष की आयु तक बालक का मस्तिष्क विकसित होकर पूर्ण आकर ले लेता है |
  • स्त्री-पुरुष दोनों के कोषों में 23-23 गुणसूत्र होते है |
  • प्रत्येक गुणसूत्र में 40 से 100 पित्रैक होते है |
  • अधिगम का बंध सिद्धांत थार्नडाइक ने दिया था |
  • प्रयोगात्मक विधि के प्रतिपादक विलियम वुंट थे |
  • थार्नडाइक ने प्रयत्न एवं भूल का सिद्धांत दिया था |

प्रयत्न भूल सिद्धांत के अन्य नाम :-

(1 )सम्बन्धवाद का सिद्धांत
(2 )उद्दीपक अनुक्रिया सिद्धांत
(3 )सिखने का सम्बन्ध सिद्धांत
(4 ) चयन संबंधन का सिद्धांत
(5 ) अधिगम का बंध सिद्धांत
(6 )आवर्ती सिद्धांत
(7 )S-R थ्योरी
थार्नडाइक ने तीन नियम भी दिए थे :-
(1 ) ततपरता का नियम
(2 ) अभ्यास का नियम
(3 ) प्रभाव का नियम
  • थार्नडाइक ने अपना प्रयोग एक भूखी बिल्ली पर किया था तथा उद्दीपक के रूप में मछली का प्रयोग किया था |
  • परम्परागत अनुकूलन सिद्धांत - पावलोव ने दिया था |
  • अनुबंधन का जनक पावलोव को कहा जाता है |
  • पावलोव ने अपना प्रयोग कुते पर किया था |
  • क्रिया प्रसूत अनुबंधन का सिद्धांत बी.एफ. स्किनर ने दिया था |

क्रिया प्रसूत सिद्धांत के अन्य नाम :-
(1) नैमितिक अधिगम सिद्धांत
(2) कार्यात्मक प्रतिबद्धता सिद्धांत
(3)रिक्त प्राणी उपागम
  • स्किनर ने अपना प्रयोग चूहे कबूतर पर किया |
  • स्किनर ने प्रयोग करने के लिए 'स्किनर बॉक्स' का प्रयोग किया |

अंतर्दृष्टि सिद्धांत :- प्रतिपादक कोहलर
अन्य नाम :-
(1) सूझ सिद्धांत
(2) गेस्टाल्ट सिद्धांत
  • कोहलर का प्रयोग- सुल्तान नामक चिम्पाजी पर
  • सूझ का अर्थ - समस्या के अचानक हल प्राप्त करने से है |
  • पुनर्बलन सिद्धांत :- प्रतिपादक क्लार्क एल.हल.
  • हल के अनुसार "आवश्कता की पूर्ति" सिखने का आधार है |
  • हल का प्रयोग - हल ने चूहे पर प्रयोग किया था |
  • अधिगम प्रतिस्थापन सिद्धांत या स्थानापन्नता का सिद्धांत :- एडविन गुथरी ने दिया था |
  • गुथरी का प्रयोग - खरगोश पर किया था |
  • संकेत-संकेतक अधिगम सिद्धांत :- टॉलमैन ने दिया |
  • क्षेत्र सिद्धांत/प्राकृतिक दशा सिद्धांत/तलरूप सिद्धांत कुर्ट लेविन ने दिया था |
  • आवश्यकता अनुक्रम सिद्धांत मास्लो ने दिया था |
  • मास्लो ने बी-मोटिव की संख्या 18 बताई है |
  • शिक्षा के क्षेत्र में क्रियात्मक अनुसन्धान की प्रक्रिया को प्रयोग में लाने का श्रेय स्टीफन एम.कोरे को जाता है |
  • शैक्षिक लब्द्धि का सूत्र बर्ट ने दिया था |
  • बुद्धि लब्धि का सूत्र टर्मन ने दिया था |
  • हस्तशिल्प की शिक्षा मंद बुद्धि एवं पिछड़े बालको को दी जनि चाहिए |


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